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दस आज्ञा। तीसरा आज्ञा

आज्ञा 3

“तू अपने परमेश्वर का नाम व्यर्थ न लेना; क्योंकि जो यहोवा का नाम व्यर्थ ले वह उसको निर्दोष न ठहराएगा।”(निर्गमन 20:7)

परमेश्वर का नाम ‘झूठ’ मे लेना इसका मतलब किया है? इसका अर्थ है परमेश्वर के नाम का हल्के के रूप में उपयोग करना या शाप देते समय या कसम खाते समय उपयोग करना।

परमेश्वर बहुत ही महान है और उसका नाम भी महान है। बाइबल कहती है,

“………उसका नाम पवित्र और भय योग्य है।”(भजन संहिता 111:9)

यीशु ने अपने शिष्यों को प्रार्थना करना सिखाया,

“…..हे पिता,तेरा नाम पवित्र माना जाए,…”(लूका 11:2)

परमेश्वर अपने लोगों को उसके नाम का व्यर्थ उपयोग करने की अनुमति नहीं देगा। अपने देश के झंडे का अनादर करना घोर अपमान है। तो फिर, हमारे सृष्टिकर्ता परमेश्वर के प्रति अनादर और अपमान दिखाना कितना अधिक गंभीर है। ऐसा करने से आप परमेश्वर के वचनों में गिने जायेंगे। बाइबल कहती है,

“…..तेरे शत्रु तेरा नाम झूठी बात पर लेते हैं।”(भजन संहिता 139:20)

कुछ लोग कोसने के अलावा कभी भी यीशु का नाम नहीं लेते। यीशु मसीह परमेश्वर के पुत्र हैं, इसलिए उनका नाम झूठा लेना पाप है। कुछ लोग परमेश्वर का नाम ग़लत ढंग से लेते हैं। लेकिन वो कहते हैं, ‘मेरे मन में ऐसा कोई इरादा नहीं है। लेकिन परमेश्वर उसे ऐसा करने की इजाजत नहीं देगा। मान लीजिए मैं किसी की घड़ी चोरी करता हूं और उसे बेचकर वह पैसा खर्च कर देता हूं। वह व्यक्ति एक है जब वह मेरे पास आए तो मैंने उनसे कहा, ‘हां, मैंने आपकी घड़ी चुराई और बेचकर पैसे खर्च कर दिए, लेकिन मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था, ऐसा कोई बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।‘ एक दिन हमें अपने हर शब्द का हिसाब परमेश्वर को देना होगा। प्रभु यीशु ने कहा,

“…… कि जो जो निकम्मी बातें मनुष्य कहेंगे, न्याय के दिन हर एक बात का लेखा देंगे।”(मत्ती 12:36)

कुछ लोग अपशब्दों के बारे में यह कहकर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश करते हैं कि यह उनकी आदत है। इसका मतलब यह है कि ऐसे व्यक्ति ने नियमित रूप से परमेश्वर के नाम का अनादर और निंदा करने के लिए खुद को प्रशिक्षित किया है। क्या परमेश्वर ऐसा बहाना स्वीकार करेगा? नहीं, वह निश्चित रूप से ऐसा नहीं करेगा। बाइबिल कहती है,

“तू अपने परमेश्वर का नाम व्यर्थ न लेना; क्योंकि जो यहोवा का नाम व्यर्थ ले वह उसको निर्दोष न ठहराएगा।”(निर्गमन 20:7)

कोसने और कसम खाने के बजाय, तुम्हें पूरे दिल से परमेश्वर से प्यार करना चाहिए। यदि तुम उससे प्रेम करते हो, तो उसके नाम की निन्दा मत करो।उस समय तक इस्राएल में दाऊद के समान कोई महान राजा नहीं था। दाऊद ने कहा

“मेरे मुंह के वचन और मेरे हृदय का ध्यान तेरे सम्मुख ग्रहण योग्य हों, हे यहोवा परमेश्वर, मेरी चट्टान और मेरे उद्धार करने वाले!”(भजन संहिता 19:14)
“उसने अपनी प्रजा का उद्धार किया है; उसने अपनी वाचा को सदा के लिये ठहराया है। उसका नाम पवित्र और भय योग्य है।”(भजन संहिता 111:9)
“उसने उनसे कहा, “जब तुम प्रार्थना करो, तो कहो:‘हे पिता,तेरा नाम पवित्र माना जाए, तेरा राज्य आए”।(लूका 11:2)

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