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बाइबल क्या है?

बाइबल का इतिहास

क्या आप जानते हैं ? बाइबल पृथ्वी पर सबसे अधिक बिकने वाली पुस्तक है।। बाइबल अन्य किताबों की तुलना में सबसे ज्यादा बिकने वाली किताब है। बाइबिल का दुनिया की किसी भी अन्य पुस्तक की तुलना में अधिक भाषाओं में अनुवाद किया गया है। यह मूल रूप से तीन भाषाओं – हिब्रू, अरामाइक और ग्रीक में लिखा गया था। बाइबिल का अनुवाद विभिन्न समर्पित व्यक्तियों द्वारा किया गया है, ताकि आप परमेस्वर के शब्दों, विचारों और योजनाओं को पा सकें। बाइबिल भी पृथ्वी पर सबसे पुरानी पुस्तकों में से एक है। बाइबिल के सबसे पुराने भाग लगभग 4,000 वर्ष पुराने हैं। फिर भी यह आज पृथ्वी पर सबसे आधुनिक पुस्तक है; क्योंकि इसी में हमें जीवन के विशेष प्रश्नों के उत्तर मिलते हैं; उदाहरण के लिए:

• मैं कहां से आया हूं ?

• मैं यहाँ क्यों हूँ ?

• मैं कहां जाऊंगा ?

आप बाइबल मे उस व्यक्ति के बारे में जान सकते हैं जो आपकी सबसे अधिक परवाह करता है। उसके पास आपके लिए एक विशेष योजना है। और जिसने आपके लिए अपना एकलौता पुत्र यीशु मसीह का बलिदान दे दिया। वो परमेश्वर इस ब्रह्मांड का रचयिता है। वह वही हैं जिसने पृथ्वी, चंद्रमा, ग्रह, सूर्य और नक्षत्र और उनके ऊपर की सभी चीज़ों को बनाया।हालाँकि बाइबल में 66 छोटी छोटी किताबें हैं, लेकिन इसका केवल एक ही केंद्रीय विषय है:

मानव जाति को बचाने(उद्धार) के लिए परमेश्वर की प्रेमपूर्ण योजना।”

परमेश्वर हमसे बेहद प्यार करता है। मानव जाति को दिया गया उसका सबसे बड़ा उपहार—उसका पुत्र, यीशु मसीह—उस प्रेम को दर्शाता है।

“क्योंकि परमेश्‍वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्‍वास करे वह नष्‍ट न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।”(यूहन्ना 3:16)

बाइबिल परमेश्वर का पवित्र वचन है. यह हमारे लिए परमेश्वर का लिखित संदेश है। बाइबिल ब्रह्माण्ड की सबसे महान पुस्तक है। इसे स्वर्गीय पुस्तकालय कहा जाता है। क्योंकि इसमें 66 छोटी-छोटी पुस्तकें मिलके बाइबल बनी हैं।

बाइबिल के पहले भाग को Old testament (पुराना नियम) कहा जाता है। इसमें 39 पुस्तकें शामिल हैं, जो यीशु मसीह के आगमन से पहले लिखी गई थीं। यह हमें दुनिया की शुरुआत के बारे में बताता है और परमेश्वर के चुने हुए इज़राइल राष्ट्र के इतिहास को दर्ज करता है।

बाइबिल के दूसरे भाग को New testament(नया नियम)कहा जाता है इसमें 27 पुस्तकें शामिल हैं। यह यीशु मसीह के पृथ्वी पर आने और स्वर्ग लौटने के बाद लिखा गया था। यह हमें यीशु मसीह के बारे में बताता है कि वह कौन है और उसने क्या किया। यह हमें यीशु मसीह के कलीसिया की शुरुआत के बारे में भी बताता है।

हमें बाइबल कैसे मिली?

परमेश्वर ने बाइबिल की रचना के लिए कई लोगों को नियुक्त किया, भले ही परमेश्वर बाइबल के वास्तविक लेखक हैं। बाइबल लगभग 16 वर्षों की अवधि में 40 से अधिक लोगों द्वारा लिखी गई थी। याद रखने वाली महत्वपूर्ण बात यह है कि दुनिया की विभिन्न स्तनों में रेहेकर भी इन लोगों ने परमेश्वर के आत्मा की नियंत्रण में बाइबल की रचना की। बाइबिल कहती है,

“क्योंकि कोई भी भविष्यद्वाणी मनुष्य की इच्छा से कभी नहीं हुई, परन्तु जो मनुष्य परमेश्वर के भेजे हुए थे, वे पवित्र आत्मा के द्वारा उभारे जाकर बोलते थे” (2 पतरस 1:21)
हर एक पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है। (2 तीमुथियुस 3:16)

बाइबल एकमात्र ऐसी पुस्तक है जो परमेश्वर के आत्मा की नियंत्रण के प्रकार 40 से भी अधिक लोगों के द्वारा लिखी गई है। बाइबिल की रचना के लिए परमेश्वर कई लोगों को नियुक्त किया लेकिन वास्तव में परमेश्वर ही इसके रचयिता हैं। बाइबल के पहले अध्याय में, परमेश्वर सचेत रूप से कहते है कि किसी को भी इसमें से कुछ भी नहीं जोड़ना या दूर करना अनुचित है।

मैं हर एक को, जो इस पुस्तक की भविष्यद्वाणी की बातें सुनता है, गवाही देता हूँ : यदि कोई मनुष्य इन बातों में कुछ बढ़ाए तो परमेश्‍वर उन विपत्तियों को, जो इस पुस्तक में लिखी हैं, उस पर बढ़ाएगा। यदि कोई इस भविष्यद्वाणी की पुस्तक की बातों में से कुछ निकाल डाले, तो परमेश्‍वर उस जीवन के वृक्ष और पवित्र नगर में से, जिसका वर्णन इस पुस्तक में है, उसका भाग निकाल देगा।(प्रकाशितवाक्य 22:18-19)

बाइबल किस बारे में लिखी गई है?

बाइबल मनुष्य के पाप में पूर्ण विनाश और मसीह में परमेश्वर के पूर्ण उद्धार का अभिलेख है। यह वर्णन करता है कि कैसे मनुष्य परमेश्वर से दूर हो गया और पाप में गिर गया, और कैसे परमेश्वर ने हमारे पापों के लिए मरने के लिए अपने पुत्र यीशु मसीह को भेजा। परमेश्वर ने हमें यह अद्भुत पुस्तक इसलिए दी है ताकि हम जान सकें कि सत्य क्या है?, बाइबल हमें हमारे बारे में, पाप के बारे में, शैतान के बारे में, मोक्ष (उद्धार)के बारे में और परमेश्वर के बारे में सच्चाई बताती है।

बाइबल हमारे लिए परमेश्वर का “प्रेम पत्र” है। यह हमें बताता है कि वह हमसे प्यार करता है और चाहता है कि हम “यीशु मसीह” को अपना “उद्धारकर्ता” मानकर उसकी संतान बनें। बाइबल पृथ्वी पर सबसे महत्वपूर्ण पुस्तक है क्योंकि यह हमें बताती है कि हम कैसे “उद्धार” पा सकते हैं। यह हमें इसके बारे में बताता है।

बाइबिल की मुख्य विषय क्या है?

बाइबिल का महान विषय “प्रभु यीशु मसीह” है। परमेश्वर के द्वारा पृथ्वी को दिए गए “उद्धारकर्ता” के बारे में पुराने नियम(Old testament)में कई आध्यात्मिक संदर्भ और भविष्यवाणियाँ हैं। यीशु मसीह इन सभी भविष्यवाणियों को पूरा करते हैं। उन्होंने स्वयं कहा,

“फिर उसने उनसे कहा, “ये मेरी वे बातें हैं, जो मैंने तुम्हारे साथ रहते हुए, तुम से कही थीं, कि अवश्य है, कि जितनी बातें मूसा की व्यवस्था और भविष्यद्वक्ताओं और भजनों की पुस्तकों में, मेरे विषय में लिखी हैं, सब पूरी हों।” (लूका 24:44)

नया नियम(New testament) की पहली चार पुस्तकों को ‘The Gospelsसुसमाचार कहा जाता है। इनमें से प्रत्येक पुस्तकयीशु मसीह” के जीवन पर एक अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। परमेश्वर ने हमें अपने बेटे की चार ‘तस्वीरें’ दी हैं। मत्ती में यीशु मसीह को ‘यहूदियों के राजा’ के रूप में प्रस्तुत करता है और यह साबित करने के लिए पुराने नियम के कई अंश उद्धृत करता है कि यीशु मसीह वास्तव में वही “मसीहा” हैं जिनको परमेश्वर ने अपने लोगों को उधारकर्ता के रूप में भेजने को वादा किया था। जबकि मरकुस मसीह को ‘संपूर्ण सेवक’ के रूप में प्रस्तुत करता है, लूका उसे ‘मनुष्य के पुत्र’ के रूप में प्रस्तुत करता है और यूहन्ना उसे ‘परमेश्वर के शाश्वत पुत्र’ के रूप में प्रस्तुत करता है। एक बेटे के रूप में।

यदि आपने बाइबल नहीं पढ़ी है, तो अभी पढ़ना शुरू करें। पाठ की शुरुआत यूहन्ना के सुसमाचार से करें। इस सुसमाचार में मूल शब्द “विश्वास” है। जिन छंदों में इसका उल्लेख है, उनमें इसे और इसके विभिन्न विषयों को रेखांकित करें और नोट करें कि शब्द का प्रयोग कितनी बार हुआ है। यूहन्ना का सुसमाचार इसलिए लिखा गया था ताकि हम परमेश्वर के पुत्रयीशु मसीह” पर विश्वास कर सकें और उसके नाम के माध्यम से अनन्त जीवन प्राप्त कर सकें। प्रेरित यूहन्ना ने कहा, “परन्तु ये सब बातें इसलिए लिखी गई हैं कि तुम विश्वास करो कि यीशु ही मसीह, परमेश्वर का पुत्र है, और विश्वास करके तुम उसके नाम से अनन्त जीवन पाओ।

“परन्तु ये इसलिये लिखे गए हैं, कि तुम विश्वास करो, कि यीशु ही परमेश्वर का पुत्र मसीह है: और विश्वास करके उसके नाम से जीवन पाओ।”(यूहन्ना20:31)

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