प्रभु यीशु ने न केवल परमेश्वर होने का दावा किया, बल्कि उन्होंने अपने शक्तिशाली कार्यों से यह साबित भी किया कि वह परमेश्वर हैं।
• यीशु की शक्ति हवा और बादलों के ऊपर थी।
एक बार यीशु अपने शिष्यों के साथ नाव में थे। जब वह वहाँ सो रहे थे, तभी एक बड़ा तूफ़ान उठा। परिणामस्वरूप, शिष्य यह सोचकर घबरा गए कि जहाज डूब जाएगा और उनका जीवन नष्ट हो जाएगा। उन्होंने यीशु को नींद से जगाया और कहा, ‘हे प्रभु, ‘हे प्रभु, हमें बचा!’ यीशु हवा और, समुद्र से कहा, शांत रहो।‘ हवा और लहरें शांत हो गईं। चेलों ने चकित होकर कहा,
“और वे अचम्भा करके कहने लगे, “यह कैसा मनुष्य है, कि आँधी और पानी भी उसकी आज्ञा मानते हैं।”(मत्ती 8:27)
• यीशु के पास बुरी आत्माओं के ऊपर शक्ति है।
दुष्ट आत्माएँ शैतान की सेवक हैं। अधिकांश समय वे लोगों में घुस जाते हैं और उन्हें शारीरिक पीड़ा देते हैं।दुष्ट आत्माओं ने यीशु को परमेश्वर के पुत्र के रूप में पहचान लिया। जब यीशु ने दुष्ट आत्माओं पीड़ित व्यक्ति की शरीर से बाहर जाने की आज्ञा दी, तो दुष्ट आत्मा यीशु का आज्ञा पालन किया। इस पर लोग चकित हुए और कहने लगे,
“इस पर सब को अचम्भा हुआ, और वे आपस में बातें करके कहने लगे, “यह कैसा वचन है? कि वह अधिकार और सामर्थ्य के साथ अशुद्ध आत्माओं को आज्ञा देता है, और वे निकल जाती हैं।”(लूका 4:36)
• यीशु के पास सभी बीमारियों और पीड़ा पर शक्ति है।
यीशु ने अंधों को दृष्टि दी; यीशु ने बधिर को सुनने की शक्ति दी, उस ने लंगड़ों को चलाया, उन्होंने सभी प्रकार की बीमारियों को ठीक किया। बाइबिल कहती है,
“सूरज डूबते समय जिन जिन के यहां लोग नाना प्रकार की बीमारियों में पड़े हुए थे, वे सब उन्हें उसके पास ले आए, और उस ने एक एक पर हाथ रखकर उन्हें चंगा किया।”(लूका 4:40)
• यीशु की शक्ति मृत्यु के ऊपर है।
यीशु ने लोगों को मृतकों में से जीवित किया। एक बार यीशु की मुलाकात नाईन नामक नगर के फाटक के पास पहुँचा, तो देखो। एक युवक की मृत्यु हो गई थी और लोग उसके शव को दफनाने के लिए जा रहे थे। वह अपनी माँ का इकलौता पुत्र था। और वह विधवा थी: उसके पति की पहले ही मृत्यु हो चुकी थी; अब वह अपने बेटे को दफनाने जा रही थी। वह बहुत रो रही थी। उसे देखकर यीशु को तरस आया। और यीशु ने कहा, “मत रो।” तब यीशु ने पास आकर अर्थी को छुआ; और मारे हुए आदमी से कहा,
“…हे जवान, मैं तुझ से कहता हूँ, उठ!”(लूका 7:14)
जैसे ही यीशु ने ये शब्द कहे, वह युवक पुनर्जीवित हो गया। वह उठ बैठा और बोलने लगा। यीशु ने उससे उसकी मां को सौंप दिया।
यीशु ने मानव शरीर में परमेश्वर की शक्ति प्रकट की।
यीशु ने ऐसे पराक्रमी कार्य किये जो कोई अन्य मनुष्य नहीं कर सका। ये शक्तिशाली कार्य क्या साबित करते हैं? यह सब साबित करता है कि यीशु परमेश्वर है! यीशु ने कहा,
“मेरा विश्वास करो, कि मैं पिता में हूं, और पिता मुझ में है; नहीं तो कामों ही के कारण मेरा विश्वास करो” (यूहन्ना 14:11)।
यीशु को ‘ईश्वर-पुरुष’ कहा जाता है। यह उसके लिए एक आदर्श नाम है, क्योंकि वह वास्तव में परमेश्वर है और वह वास्तव में मनुष्य है।
“आदि मेंa वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था।“(यूहन्ना 1:1)
“और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा”।(यूहन्ना 1:14)
“वह लहू में डुबोया हुआ वस्त्र पहने है, और उसका नाम ‘परमेश्वर का वचन’ है।”(प्रकाशित वाक्य 19:13)