क्या आपने कभी ऐसे सवालों के बारे में सोचा है? क्या परमेश्वर का अस्तित्व है?परमेश्वर कौन है?मैं परमेश्वर के बारे में कैसे सीख सकता हूँ? ये बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्न हैं. इनके उत्तर हम इस पाठ में पा सकते हैं।
क्या परमेश्वर का अस्तित्व है?
हाँ, एक सच्चा और जीवितपरमेश्वर है। वह परमेश्वर है जिसने सब कुछ बनाया। उसने हमें और इस धरती को भी बनाया जिस पर हम रहते हैं।हमारे दिल में कोई हमसे कहता है कि परमेश्वर है और हमें उसे जानने की जरूरत है।
हम परमेश्वर के बारे में कैसे सीख सकते हैं?
हम ‘बाइबल‘ नामक अद्भुत पुस्तक से परमेश्वर के बारे में सीख सकते हैं। यह परमेश्वर का पवित्र वचन है। तो, आपको यह जानने में रुचि हो सकती है कि यह पुस्तक किसने लिखी और यह पृथ्वी पर कैसे आई।बाइबल का वास्तविक लेखक स्वयं परमेश्वर है, लेकिन इसके विभिन्न भागों को लिखने के लिए उसने कई लोगों का उपयोग किया। परमेश्वर ने इन लोगों के माध्यम से वह सब कुछ प्रकट किया जो वह लिखना चाहता था। इसी लेखन या रचना के आधार पर ‘बाइबल’ का निर्माण होता है।बाइबल बताती है
“क्योंकि कोई मनुष्य जो कहना चाहता है, उसके अनुसार भविष्यवाणी नहीं होती। बल्कि पवित्र आत्मा की प्रेरणा से मनुष्य परमेश्वर की वाणी बोलते हैं।“ ( 2 पतरस 1:21)
परमेश्वर ने हमें यह अद्भुत पुस्तक इसलिए दी है ताकि हम सत्य को जान सकें। बाइबल हमें परमेश्वर के बारे में सच्चाई बताती है, हम वास्तव में कौन हैं। परमेश्वर के साथ हम कैसे सही रिश्ता बना सकते हैं इसके बारे में सच्चाई बताती है।
सच्चा परमेश्वर कौन है? वो कैसा है?
परमेश्वर इतना महान और अद्भुत है कि हम उसके बारे में कभी भी सब कुछ नहीं जान सकते। उसका कोई आरंभ नहीं है और उसका कोई अंत नहीं है। ऐसी कोई जगह नहीं है जहां उनकी उपस्थिति महसूस न की जा सके।
फिर यहोवा की यह वाणी है, क्या कोई ऐसे गुप्त स्थानों में छिप सकता है, कि मैं उसे न देख सकूं? क्या स्वर्ग और पृथ्वी दोनों मुझ से परिपूर्ण नहीं हैं?( यिर्मयाह 23:24 )
क्या आप शोध के माध्यम से परमेश्वर को पा सकते हैं? क्या तुम्हें सर्वशक्तिमान का पूरा ज्ञान हो सकता है?लेकिन, परमेश्वर ने हमें तालिका दी है और इस पुस्तक बाइबल में उन्होंने अपनी कई बातें प्रकट की हैं।बाइबल हमें बताती है: परमेश्वर स्वर्ग में रहता है और पूरी पृथ्वी पर शासन करता है।
“यहोवा यों कहता है, “स्वर्ग मेरा सिंहासन है, और पृथ्वी मेरे चरणों की चौकी है।“ (यशायाह 66:1)
“परमेश्वर जाति जाति पर राज्य करता है; परमेश्वर अपने पवित्र सिंहासन पर विराजमान है।“ (भजन संहिता 47:8)
बाइबल से हम जानते हैं कि केवल एक ही सच्चा और जीवित परमेश्वर है। आज कुछ लोग सच्चे परमेश्वर को नहीं जानते। वे विभिन्न वस्तुओं से अपने स्वयं के देवता बनाते हैं और इन देवताओं से प्रार्थना करते हैं। परन्तु ये देवता न तो उनकी प्रार्थना सुन सकते हैं, न देख सकते हैं और न ही उनकी किसी प्रकार सहायता कर सकते हैं।
“क्योंकि देश देश के सब देवता तो मूरतें ही हैं; परन्तु यहोवा ही ने स्वर्ग को बनाया है।“ (भजन संहिता 96:5)
“हमारा परमेश्वर तो स्वर्ग में हैं; उसने जो चाहा वही किया है। उन लोगों की मूरतें सोने चान्दी ही की तो हैं, वे मनुष्यों के हाथ की बनाईं हुई हैं। उनका मुंह तो रहता है परन्तु वे बोल नहीं सकती; उनके आंखें तो रहती हैं परन्तु वे देख नहीं सकतीं। उनके कान तो रहते हैं, परन्तु वे सुन नहीं सकतीं; उनके नाक तो रहती हैं, परन्तु वे सूंघ नहीं सकतीं। उनके हाथ तो रहते हैं, परन्तु वे स्पर्श नहीं कर सकतीं; उनके पांव तो रहते हैं, परन्तु वे चल नहीं सकतीं; और अपने कण्ठ से कुछ भी शब्द नहीं निकाल सकतीं। जैसी वे हैं वैसे ही उनके बनाने वाले हैं; और उन पर भरोसा रखने वाले भी वैसे ही हो जाएंगे॥“ (भजन संहिता 115:3-8)
परन्तु हमें सच्चे और जीवित परमेश्वर को अवश्य जानना चाहिए, वह परमेश्वर जो हमें देखता है, जो हमें सुनता है, और हमारी सहायता कर सकता हे।
परमेश्वर कैसा है?
• परमेश्वर इतने महान हैं कि वे हाथ से बनाए हुए मंदिरों में नहीं रह सकते
जिस परमेश्वर ने जगत और पृथ्वी का सब कुछ बनाया वह स्वर्ग और पृथ्वी का स्वामी होकर, हाथ से बनाए हुए मन्दिरों में नहीं रहता न किसी वस्तु की आवश्यकता के कारण मनुष्यों के हाथों की सेवा लेता है, क्योंकि वह स्वयं ही सब को जीवन और श्वास और सब कुछ देता है।
“जिस परमेश्वर ने पृथ्वी और उस की सब वस्तुओं को बनाया, वह स्वर्ग और पृथ्वी का स्वामी होकर हाथ के बनाए हुए मन्दिरों में नहीं रहता।न किसी वस्तु का प्रयोजन रखकर मनुष्यों के हाथों की सेवा लेता है, क्योंकि वह तो आप ही सब को जीवन और स्वास और सब कुछ देता है। क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं।”(प्रेरितों के काम 17:24,25,28)
• मनुष्य का शरीर परमेश्वर को मंदिर है
“क्या तुम नहीं जानते कि तुम्हारी देह पवित्र आत्मा का मन्दिर है, जो तुम में बसा हुआ है और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला है; और तुम अपने नहीं हो? क्योंकि दाम देकर मोल लिये गए हो, इसलिये अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो।“ (1 कुरिन्थियों 6:19-20)
• परमेश्वर हर चीज़ का निर्माता है
जब आप आकाश, सूर्य, चंद्रमा, सितारे,पहाड़ों, समुद्र, जानवर, पक्षियों, पेड़, पौधे और इंसान को देखते हैं तो आप क्या महसूस करते हैं? आपको एहसास हो गया होगा कि इन सब चीजों के कोई सृष्टिकर्ता है.
“तू ही अकेला यहोवा है; स्वर्ग वरन सब से ऊंचे स्वर्ग और उसके सब गण, और पृथ्वी और जो कुछ उस में है, और समुद्र और जो कुछ उस में है, सभों को तू ही ने बनाया, और सभों की रक्षा तू ही करता है; और स्वर्ग की समस्त सेना तुझी को दण्डवत करती हैं।“ (नहेमायाह 9:6)
• परमेश्वर मनुष्य का निर्माता है
मनुष्य परमेश्वर के द्वारा बनाया गया बाइबल हमें बताती है कि परमेश्वर ने अपने हातो से मनुष्य की रचना की परमेश्वर ने उनको आशीष दी; और उनसे कहा, “फूलो-फलो, और पृथ्वी में भर जाओ
“तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया, नर और नारी करके उसने उसको उत्पन्न किया। और परमेश्वर ने उनको आशीष दी, और उनसे कहा, फूलो-फलो, और पृथ्वी में भर जाओ, और उसको अपने वश में कर लो; और समुद्र की मछलियों, तथा आकाश के पक्षियों, और पृथ्वी पर रेंगनेवाले सब जन्तुओं पर अधिकार रखो” (उत्पत्ति 1:27-28)
• माता के गर्भ में मनुष्य को रचनेबाला महान परमेश्वर ।
“मेरे मन का स्वामी तो तू है; तू ने मुझे माता के गर्भ में रचा। मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं। जब मैं गुप्त में बनाया जाता, और पृथ्वी के नीचे स्थानों में रचा जाता था, तब मेरी हडि्डयां तुझ से छिपी न थीं। तेरी आंखों ने मेरे बेडौल तत्व को देखा; और मेरे सब अंग जो दिन दिन बनते जाते थे वे रचे जाने से पहिले तेरी पुस्तक में लिखे हुए थे।“ (भजन संहिता 139:13-16)
परमेश्वर ने मनुष्य को कान, आंखें, बुद्धि, समझ और इच्छाशक्ति दी है, क्योंकि उसके पास ये सब हैं। विवेक मनुष्य को सही और गलत बताताहै; अच्छाई और बुराई सिखाता है; क्योंकि सृष्टिकर्ता नैतिक अर्थात् पवित्र है, और धर्म से प्रेम रखता है, परन्तु दुष्टता से बैर रखता है।
“जिसने कान दिया, क्या वह आप नहीं सुनता?जिसने आँख रची, क्या वह आप नहीं देखता?” (भजन संहिता 94:9)
• केवल एक ही सच्चा और जीवित परमेश्वर है
केवल एक ही सच्चा और जीवित परमेश्वर है; फिर भी वह तीन व्यक्तियों में विद्यमान है – पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा (परमेश्वर पिता, परमेश्वर पुत्र और परमेश्वर पवित्र आत्मा वे तीन हैं, लेकिन एक ही परमेश्वर हैं)। भले ही हम इसे न समझें, हम जानते हैं कि यह बिल्कुल सत्य है, क्योंकि हम इसे परमेश्वर के पवित्र वचन बाइबल से सीखते हैं। परमेश्वर तो एक ही है, फिर भी उसमें तीन हैं-पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा हम बाइबल से परमेश्वर के बारे में और भी बहुत सी बातें सीखते हैं।