आज्ञा 6
हत्या न करना परमेश्वर की छठी आज्ञा है। निर्गमन 20:13 में परमेश्वर कहता है, “तू खून न करना।” यह आज्ञा हमें प्रत्येक मनुष्य के जीवन का सम्मान करना सिखाती है।
“तू खून न करना॥”(निर्गमन 20:13)
इस आदेश का मतलब यह नहीं है कि यह भोजन के लिए जानवरों की हत्या पर रोक लगाता है। यह आत्मरक्षा में किसी की हत्या करने पर रोक नहीं लगाता है। यह किसी व्यक्ति को किसी की हत्या करने के लिए कानूनी तौर पर मौत की सज़ा देने से नहीं रोकता है। परमेश्वर ने स्वयं दूसरों की हत्या करने वालों के लिए मृत्युदंड निर्धारित किया है। उसने कहा,
परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप में बनाया है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य का जीवन उसकी दृष्टि में अनमोल और मूल्यवान है। इसी कारण परमेश्वर निर्दोष मनुष्य की हत्या को पाप ठहराता है।
“जो कोई मनुष्य का लोहू बहाएगा उसका लोहू मनुष्य ही से बहाया जाएगा क्योंकि परमेश्वर ने मनुष्य को अपने ही स्वरूप के अनुसार बनाया है।”(उत्पत्ति 9:6)
परमेश्वर चाहता है कि हम प्रत्येक मनुष्य के जीवन का आदर करें, क्योंकि प्रत्येक मनुष्य परमेश्वर के स्वरूप में बनाया गया है। इसलिए किसी निर्दोष व्यक्ति का जीवन लेना परमेश्वर की दृष्टि में बहुत बड़ा पाप है। यह आज्ञा हमें सिखाती है कि हम दूसरों के जीवन की रक्षा करें, उनके साथ प्रेम और दया का व्यवहार करें तथा किसी के प्रति हिंसा और बैर की भावना न रखें। जब हम ऐसा करते हैं, तब हम परमेश्वर की इच्छा के अनुसार जीवन जीते हैं।
इस आज्ञा का अर्थ है, “तू हत्या नहीं करेगा।” कुछ लोग वास्तव में हत्या करते हैं, लेकिन परमेश्वर केवल हमारे कार्यों को ही नहीं, बल्कि हमारे हृदय को भी देखते हैं। यदि हमारे मन में किसी के प्रति बैर और घृणा है, तो यह भी परमेश्वर की दृष्टि में गंभीर बात है।
बाइबल कहती है कि घातक पाप हृदय से शुरू होता है। यीशु मसीह ने कहा,
“क्योंकि भीतर से, अर्थात् मनुष्य के मन से, बुरे-बुरे विचार, व्यभिचार, चोरी, हत्या, परस्त्रीगमन,
“लोभ, दुष्टता, छल, लुचपन, कुदृष्टि, निन्दा, अभिमान, और मूर्खता निकलती हैं।
ये सब बुरी बातें भीतर ही से निकलती हैं और मनुष्य को अशुद्ध करती हैं।”(मरकुस 7:21-23)
परमेश्वर जानता है कि हमारे दिल में क्या है। वह जानता है कि हम क्या सोचते हैं। यह वचन हमें सिखाता है कि हत्या की शुरुआत मनुष्य के हृदय से होती है। जब कोई व्यक्ति अपने मन में बैर, घृणा और द्वेष को स्थान देता है, तो वह परमेश्वर की इच्छा के विरुद्ध चलता है। इसलिए परमेश्वर चाहता है कि हमारा हृदय भी शुद्ध हो। बाइबल कहती है,
“जो कोई अपने भाई से बैर रखता है, वह हत्यारा है………..”(1 यूहन्ना 3:15)
इस आज्ञा का पालन कैसे करें?
आज के समय में इस आज्ञा का पालन केवल किसी का जीवन न लेने तक सीमित नहीं है। हमें अपने हृदय से बैर, घृणा, क्रोध और बदले की भावना को भी दूर करना चाहिए। यदि किसी ने हमारे साथ बुरा किया है, तो परमेश्वर हमें क्षमा करना और शांति स्थापित करना सिखाता है। हमें दूसरों के साथ प्रेम, दया और सम्मान का व्यवहार करना चाहिए। जब हम अपने विचारों, शब्दों और व्यवहार में मसीह के प्रेम को प्रकट करते हैं, तब हम इस आज्ञा का सच्चे अर्थ में पालन करते हैं।
छठी आज्ञा हमें केवल हत्या से दूर रहने की शिक्षा नहीं देती, बल्कि अपने हृदय को बैर, घृणा और क्रोध से भी शुद्ध रखने के लिए बुलाती है। जब हम दूसरों से प्रेम करते हैं, उन्हें क्षमा करते हैं और उनके साथ शांति से रहते हैं, तब हम परमेश्वर की इच्छा के अनुसार जीवन जीते हैं।
जब हम इस आज्ञा का पालन करते हैं, तब हमारा जीवन परमेश्वर के प्रेम, दया और पवित्रता को प्रकट करता है। आइए, हम अपने विचारों, शब्दों और व्यवहार में मसीह के समान बनने का प्रयास करें और प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का सम्मान करें। जब हम ऐसा करते हैं, तब हमारा जीवन परमेश्वर के प्रेम और पवित्रता की गवाही बन जाता है।
