यीशु मसीह नए परिवार के मुखिया हैं। परमपिता परमेश्वर ने यीशु मसीह को न केवल सभी सृष्टि का प्रभु ठहराया, बल्कि अपने नए आत्मिक परिवार का मुखिया भी नियुक्त किया।इस नए परिवार को “परमेश्वर के बच्चे” परमेश्वर के पुत्र और पुत्रियाँ नाम दिया गया है।
अब पृथ्वी पर दो परिवार हैं। इनमें से प्रत्येक परिवार का एक मुखिया होता है। आदम, आदम द्वारा बनाए गए पापी परिवार का मुखिया है, और यीशु मसीह परमेश्वर की संतान कहलाने वाले नए परिवार का मुखिया है।
हमें फिर से जन्म लेना चाहिए।
अपने जन्म के समय हममें से प्रत्येक आदम की पाप-पूर्व जाति का सदस्य बन गए। आदम के पापी परिवार का कोई व्यक्ति परमेश्वर को स्वीकार्य नहीं होता। आदम की जाति में से कोई भी परमेश्वर की दृष्टि में धर्मी नहीं है। आदम के परिवार में से कोई भी परमेश्वर के अनुसार सिद्ध और पवित्र नहीं है। बाइबिल कहती है,
“इसलिये जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, इसलिये कि सब ने पाप किया।” (रोमियो 5:12)
“जैसा लिखा है, कि कोई धर्मी नहीं, एक भी नहीं।”(रोमियो 3:10)
“इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं। (रोमियो 3:23)
तो फिर हम आदम के पापी परिवार से बाहर आकर मसीह के परिवार में कैसे प्रवेश कर सकते हैं? तो एक ही रास्ता है – हमें फिर से जन्म लेना होगा। प्रभु यीशु ने कहा,
“यीशु ने उस को उत्तर दिया; कि मैं तुझ से सच सच कहता हूं, यदि कोई नये सिरे से न जन्मे तो परमेश्वर का राज्य देख नहीं सकता।”(यूहन्ना 3:3)
फिर से जन्म लेने का क्या मतलब हो सकता है?

“मैं तुझ से सच सच कहता हूँ; जब तक कोई मनुष्य जल और आत्मा से न जन्मे तो वह परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता।” (यूहन्ना 3:5)
इसका का अर्थ आत्मिक पुनर्जन्म के माध्यम से परमेश्वर के परिवार में जन्म लेना है। हम शारीरिक रूप में पुनर्जन्म नहीं ले सकते, लेकिन हम आत्मिक रूप से पुनर्जन्म ले सकते हैं। यह नया जन्म परमेश्वर का कार्य है, और यह हमारे मन के वास्तविक परिवर्तन और बचाने वाले विश्वास के साथ ही संभव है।
“सो बपतिस्मा के द्वारा हम उसके साथ मृत्यु में गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मसों में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नए जीवन में चलें।” (रोमियों 6:4)
“क्योंकि तुम में से जितनों ने मसीह का बपतिस्मा लिया है, उन्होंने मसीह को पहन लिया है।” (गलतियों 3:27)
“इसलिये तुम जाकर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ और उन्हें पिता, और पुत्र, और पवित्रआत्मा के नाम से बपतिस्मा दो।” (मत्ती 28:19)
“जो विश्वास करे और बपतिस्मा ले, उसी का उद्धार होगा;……..(मरकुस 16:16)
“क्योंकि जैसा एक मनुष्य (आदम) के आज्ञा न मानने से बहुत लोग पापी ठहरे, वैसे ही एक मनुष्य (यीशु) के आज्ञा मानने से बहुत लोग धर्मी ठहरेंगे।”(रोमियो 5:19)
परमेश्वर के परिवार का सदस्य कैसे बनें?
बाइबल सिखाती है कि प्रत्येक मनुष्य पापी स्वभाव के साथ जन्म लेता है। इसलिए कोई भी अपने अच्छे कामों से परमेश्वर के परिवार का सदस्य नहीं बन सकता। परमेश्वर ने अपने प्रेम में यीशु मसीह को भेजा ताकि जो कोई उन पर विश्वास करे, वह नया जीवन पाए।जब कोई व्यक्ति अपने पापों से मन फिराकर यीशु मसीह पर विश्वास करता है, तब परमेश्वर उसे नया जन्म देता है और वह उसके परिवार का सदस्य बन जाता है। इसके बाद वह आज्ञाकारिता का जीवन जीता है और बपतिस्मा के द्वारा अपने विश्वास की सार्वजनिक गवाही देता है।
निष्कर्ष
आदम के द्वारा पाप संसार में आया, परन्तु यीशु मसीह के द्वारा उद्धार और नया जीवन उपलब्ध हुआ। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि केवल शारीरिक जन्म से नहीं, बल्कि नए जन्म के द्वारा ही हम परमेश्वर के परिवार के सदस्य बनते हैं। यही कारण है कि यीशु मसीह नए परिवार के मुखिया हैं, और जो उन पर विश्वास करता है वह उनके परिवार का भाग बन जाता है।
