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दस आज्ञा। पाँचवाँ आज्ञा

आज्ञा 5

तू अपने पिता और अपनी माता का आदर करना।

“तू अपने पिता और अपनी माता का आदर करना, जिस से जो देश तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देता है उस में तू बहुत दिन तक रहने पाए॥”(निर्गमन 20:12)

परमेश्वर को इस बात की चिंता है कि हम अपने माता-पिता के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। परमेश्‍वर हमें अपने माता-पिता का आदर करने की आज्ञा देता है। किसी के माता-पिता को “आदर” करने का अर्थ है उनकी भक्ति करना, उनका सम्मान करना और उनकी आज्ञा का पालन करना। हमें अपने माता-पिता का आदर क्यों करना चाहिए? हमें उनका आदर करना चाहिए, क्योंकि परमेश्वर ने हमें ऐसा करने की आज्ञा दी है।

माता-पिता घर में परमेश्वर के अधिकार का प्रतिनिधित्व करते हैं। परमेश्वर ने पिता को परमेश्वर के अधीन, परिवार का मुखिया नियुक्त किया है। पत्नी को अपने पति के अधीन रहना चाहिए और बच्चों को अपने माता-पिता के अधीन रहना चाहिए।

बाइबल हमें बताती है कि अंतिम दिनों के संकेतों में से एक यह होगा: लोग अपने माता-पिता के प्रति आज्ञा का उल्लंघन कारी होंगे। परमेश्वर का वचन कहता है,

“पर यह जान रख, कि अन्तिम दिनों में कठिन समय आएँगे।
क्योंकि मनुष्य स्वार्थी, धन का लोभी, डींगमार, अभिमानी, निन्दक, माता-पिता की आज्ञा टालनेवाले, कृतघ्न, अपवित्र,
दया रहित, क्षमा रहित, दोष लगानेवाले, असंयमी, कठोर, भले के बैरी,
विश्वासघाती, हठी, अभिमानी और परमेश्वर के नहीं वरन् सुख-विलास ही के चाहनेवाले होंगे।
वे भक्ति का भेष तो धरेंगे, पर उसकी शक्ति को न मानेंगे; ऐसों से परे रहना।”(2 तिमोथी 3:1-5)

परमेश्वर हमसे कहते हैं, “आप अपने पिता और मां का सम्मान करें.’’ अधिकांश लोगों के लिए एक दिन ऐसा आता है जब उनके पिता और माता उनके पास नही होते उनकी मृत्यु हो जाती है। और, यदि आप अपने माता-पिता को वह सम्मान नहीं देते जो आपको देना चाहिए, तो कल्पना करें कि वह दीन (समय) आने पर आपको कितना कड़वा अनुभव होगा!

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