हमें बाइबल कैसे पढ़नी चाहिए

हमें बाइबल कैसे पढ़नी चाहिए।

हमें बाइबल कैसे पढ़नी चाहिए? यह प्रश्न हर उस व्यक्ति के मन में आता है जो परमेश्वर के वचन को सही तरीके से समझना चाहता है। बहुत से लोग बाइबल पढ़ना शुरू तो करते हैं, लेकिन उन्हें समझ नहीं आता कि कहाँ से शुरू करें और उसे अपने जीवन में कैसे लागू करें। इस अध्ययन में हम बाइबल से सीखेंगे कि परमेश्वर चाहता है कि हम उसके वचन को प्रतिदिन पढ़ें, उस पर विश्वास करें, उसे अपने हृदय में रखें और उसके अनुसार जीवन जिएँ।

परमेश्वर चाहता है कि हम बाइबल में निम्नलिखित चार चीजें करें:

1) इसे हर दिन पढ़ें

2) इस पर विश्वास करें

3) इसे याद रखें

4) इसका पालन करें

1. प्रतिदिन बाइबल पढ़ें

हमें प्रतिदिन बाइबल क्यों पढ़नी चाहिए? हमें हर दिन बाइबल पढ़नी चाहिए, क्योंकि इसके माध्यम से परमेश्वर हमसे बात करते हैं। और हमें बताते हैं कि वह क्या चाहते हैं कि हम जानें और क्या करें।

बाइबल का अध्ययन हमारे आत्मिक जीवन के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि भोजन करना हमारे भौतिक जीवन के लिए। हम परमेश्वर के वचन से अलग होकर ईसाई जीवन नहीं जी सकते। प्रभु यीशु ने कहा,

“यीशु ने उसे उत्तर दिया, “लिखा है: ‘मनुष्य केवल रोटी से जीवित न रहेगा।”(लूका 4:4)

2. बाइबल पर विश्वास

हम बाइबल पर विश्वास करें यदि हमारे पास विश्वास नहीं है तो हम परमेश्वर को प्रसन्न नहीं कर सकते।

“और विश्‍वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है; क्योंकि परमेश्‍वर के पास आनेवाले को विश्‍वास करना चाहिए कि वह है, और अपने खोजनेवालों को प्रतिफल देता है।”(इब्रानियों 11:6)

विश्वास क्या है? विश्वास परमेश्वर के वचन पर विश्वास करना है।यदि अन्य लोग बाइबल पर अविश्वास करना चाहते हैं, तो उन्हें ऐसा करने दें, लेकिन आप अपने हृदय में आश्वस्त रहें कि बाइबल परमेश्वर का पवित्र वचन हैबाइबिल कहती है,

“हे यहोवा, तेरा वचन, आकाश में सदा तक स्थिर रहता है।”(भजन संहिता 119:89)

3. बाइबल के पदों को याद रखें

बाइबल ‘आत्मा की तलवार’ है, अर्थात् यह शैतान के विरुद्ध उपयोग करने के लिए हमारी अस्त्र है।

प्रभु यीशु ने परमेश्वर के वचनों का प्रयोग तब किया जब जंगल में शैतान द्वारा उनकी परीक्षा ली जा रही थी। यीशु ने धर्मग्रंथों को याद किया और शैतान को हराने के लिए उनका उपयोग किया। जितनी बार शैतान ने प्रभु यीशु को प्रलोभित किया, प्रभु यीशु ने कहा, ‘यह लिखा है’ और धर्मग्रंथों से एक वचन का उपयोग किया। और शैतान पराजित हो गया!

यदि हमें शैतान के प्रलोभनों पर विजय होना चाहते हैं, तो हमें परमेश्वर का वचन को याद रखना चाहिए। इसे ‘परमेश्वर के वचन को अपने हृदय में रखना’ कहा जाता है। बाइबल कहती हैं,

“मैंने तेरे वचन को अपने हृदय में रख छोड़ा है,कि तेरे विरुद्ध पाप न करूँ।”(भजन संहिता 119:11)

4. बाइबल के वचन का पालन करें

बाइबल में विश्वास करने योग्य तथ्य हैं,दावा करने वाली प्रतिज्ञाएं है,पालन करने वाली आज्ञा है। परमेश्वर चाहते हैं कि हम उनके आज्ञा पालन करें। यीशु ने कहा,

“जो मुझ से, ‘हे प्रभु! हे प्रभु!’ कहता है, उनमें से हर एक स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न करेगा, परन्तु वही जो मेरे स्वर्गीय पिता की इच्छा पर चलता है।”(मत्ती 7:21)

परमेश्वर उन लोगों को आशीर्वाद देता है जो परमेश्वर के वचन का पालन करते हैं। प्रभु यीशु मसीह ने कहा,

“उस ने कहा, हां; परन्तु धन्य वे हैं, जो परमेश्वर का वचन सुनते और मानते हैं।”(लूका 11:28)

जीवन का मार्ग

मन परिवर्तन

“इसलिये परमेश्वर आज्ञानता के समयों में अनाकानी करके, अब हर जगह सब मनुष्यों को मन फिराने की आज्ञा देता है।”(प्रेरितों के काम 17:30)
“क्योंकि उस ने एक दिन ठहराया है, जिस में वह उस मनुष्य के द्वारा धर्म से जगत का न्याय करेगा, जिसे उस ने ठहराया है और उसे मरे हुओं में से जिलाकर, यह बात सब पर प्रामाणित कर दी है।”(प्रेरितों के काम 17:31)

विश्वास (अंगीकार)

“उन्होंने कहा, प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास कर, तो तू और तेरा घराना उद्धार पाएगा।”(प्रेरितों के काम 16:31)
“कि यदि तू अपने मुंह से यीशु को प्रभु जानकर अंगीकार करे और अपने मन से विश्वास करे, कि परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया, तो तू निश्चय उद्धार पाएगा।”(रोमियो 10:9)

ग्रहण

“वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया।”(यूहन्ना 1:11)
“परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उस ने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं।”(यूहन्ना 1:12)

अनुकरण करना

“उस ने सब से कहा, यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे, तो अपने आप से इन्कार करे और प्रति दिन अपना क्रूस उठाए हुए मेरे पीछे हो ले।”(लूका 9:23)

हमें बाइबल कैसे पढ़नी चाहिए?

हमें प्रतिदिन बाइबल पढ़नी चाहिए, उस पर विश्वास करना चाहिए, उसके वचनों को याद रखना चाहिए और उनके अनुसार जीवन जीना चाहिए।

बाइबल प्रतिदिन क्यों पढ़नी चाहिए?

क्योंकि बाइबल के माध्यम से परमेश्वर हमसे बात करते हैं, हमें सत्य सिखाते हैं और हमारे जीवन के लिए सही मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

बाइबल के वचनों को याद रखना क्यों आवश्यक है?

बाइबल के वचन हमें प्रलोभनों पर विजय पाने, विश्वास में दृढ़ रहने और परमेश्वर की इच्छा के अनुसार जीवन जीने में सहायता करते हैं।

क्या केवल बाइबल पढ़ना ही पर्याप्त है?

नहीं। बाइबल पढ़ने के साथ-साथ उस पर विश्वास करना, उसके वचनों का पालन करना और उन्हें अपने दैनिक जीवन में लागू करना भी आवश्यक है।

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